श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.28.18 
अतीव वातस्तिमिरं बुभुक्षा चाति नित्यश:।
भयानि च महान्त्यत्र ततो दु:खतरं वनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘वन में भयंकर तूफान, घोर अंधकार, प्रतिदिन भूख की पीड़ा और अनेक महान भय रहते हैं; इसलिए वह वन अत्यंत कष्टदायक है॥18॥
 
‘In the forest there are fierce storms, intense darkness, daily pangs of hunger and many other great fears; therefore the forest is extremely troublesome.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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