श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.28.14 
देवतानां पितॄणां च कर्तव्यं विधिपूर्वकम्।
प्राप्तानामतिथीनां च नित्यश: प्रतिपूजनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘प्रतिदिन विधिपूर्वक देवताओं, पितरों और अतिथियों का पूजन करना वनवासी का प्रधान कर्तव्य है ॥14॥
 
‘Worshiping the gods, ancestors and guests daily in accordance with the prescribed rituals is the primary duty of a forest dweller. ॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas