श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.28.13 
उपवासश्च कर्तव्यो यथा प्राणेन मैथिलि।
जटाभारश्च कर्तव्यो वल्कलाम्बरधारणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘मिथिलेशकुमारी! यथाशक्ति व्रत करना, सिर पर जटाओं का भार धारण करना और छाल के वस्त्र धारण करना - यही वहाँ का जीवन है॥13॥
 
‘Mithilesh Kumari! Fasting according to one's strength, carrying the load of matted hair on the head and wearing bark clothes - this is the way of life there.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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