श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 27: सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.27.6 
न पिता नात्मजो वात्मा न माता न सखीजन:।
इह प्रेत्य च नारीणां पतिरेको गति: सदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'स्त्रियों के लिए इस लोक और परलोक में एकमात्र सहारा उनका पति ही होता है। पिता, पुत्र, माता, मित्र और यहाँ तक कि उनका यह शरीर भी उनका सच्चा सहायक नहीं होता।
 
‘For women, the only support in this world and the next is their husband. Father, son, mother, friends and even this body of theirs are not their true helpers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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