| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 27: सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 2.27.4  | आर्यपुत्र पिता माता भ्राता पुत्रस्तथा स्नुषा।
स्वानि पुण्यानि भुञ्जाना: स्वं स्वं भाग्यमुपासते॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | आर्यपुत्र! पिता, माता, भाई, पुत्र और पुत्रवधू - ये सभी पुण्य कर्मों का फल भोगते हैं और अपने-अपने प्रारब्ध (शुभ-अशुभ कर्मों) के अनुसार जीवनयापन करते हैं।॥4॥ | | | | 'Aryaputra! Father, mother, brother, son and daughter-in-law – all of them enjoy the fruits of virtuous deeds and live according to their respective destiny (auspicious and bad deeds). 4॥ | | ✨ ai-generated | | |
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