श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 27: सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.27.16 
फलमूलाशना नित्यं भविष्यामि न संशय:।
न ते दु:खं करिष्यामि निवसन्ती त्वया सदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘वहाँ जाकर मैं तुम्हें कोई कष्ट नहीं दूँगा। मैं सदैव तुम्हारे साथ रहूँगा और प्रतिदिन केवल फल-मूल खाकर जीवित रहूँगा। मेरे कथन में किसी प्रकार के संदेह की गुंजाइश नहीं है।॥16॥
 
‘I will not cause you any trouble when I go there. I will always stay with you and will survive by eating only fruits and roots every day. There is no room for any kind of doubt in my statement.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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