श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 27: सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.27.10 
अनुशिष्टास्मि मात्रा च पित्रा च विविधाश्रयम्।
नास्मि सम्प्रति वक्तव्या वर्तितव्यं यथा मया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'मेरे माता-पिता ने मुझे अनेक प्रकार से सिखाया है कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। इस समय मुझे इस विषय में कोई उपदेश देने की आवश्यकता नहीं है।॥10॥
 
'My mother and father have taught me in many ways about how I should behave with whom. At present, there is no need to give me any advice on this.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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