श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 27: सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.27.1 
एवमुक्ता तु वैदेही प्रियार्हा प्रियवादिनी।
प्रणयादेव संक्रुद्धा भर्तारमिदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की यह बात सुनकर मधुरभाषी विदेह राजकुमारी सीता, जो सब प्रकार से अपने पति के प्रेम के योग्य थीं, प्रेम के कारण कुछ क्रोधित हो गईं और अपने पति से इस प्रकार बोलीं-॥1॥
 
On hearing Sri Rama say this, the sweet-talking Videha princess Sita, who was worthy of her husband's love in every way, became a little angry due to love and spoke to her husband thus -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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