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ramayan 2.26.8: उनका मुख उदास हो गया था। उनके अंग पसीने से तर हो गए थे। वे अपने शोक को दबा नहीं पा रहे थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर सीता शोक से भर गईं और बोलीं - 'प्रभु! इस समय आपकी क्या दशा है?॥8॥   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.26.8 
विवर्णवदनं दृष्ट्वा तं प्रस्विन्नममर्षणम्।
आह दु:खाभिसंतप्ता किमिदानीमिदं प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उनका मुख उदास हो गया था। उनके अंग पसीने से तर हो गए थे। वे अपने शोक को दबा नहीं पा रहे थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर सीता शोक से भर गईं और बोलीं - 'प्रभु! इस समय आपकी क्या दशा है?॥8॥
 
His face had turned sad. His limbs were sweating. He was unable to suppress his grief. Seeing him in this state, Sita was filled with grief and said - 'Lord! What is your condition at this time?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)