Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.26.37: 'अतः कल्याणी! तुम राजा भरत के अनुकूल आचरण करते हुए धर्म और व्रत में तत्पर होकर यहाँ निवास करो॥37॥   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.26.37 
सा त्वं वसेह कल्याणि राज्ञ: समनुवर्तिनी।
भरतस्य रता धर्मे सत्यव्रतपरायणा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'अतः कल्याणी! तुम राजा भरत के अनुकूल आचरण करते हुए धर्म और व्रत में तत्पर होकर यहाँ निवास करो॥37॥
 
'So Kalyani! You, behaving in a manner favorable to King Bharata, reside here, being committed to religion and fasting. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)