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ramayan 2.26.34: 'विदेहनन्दिनी! तुम्हें भरत की इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस समय वे मेरे देश और कुल के राजा हैं।   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.26.34 
विप्रियं च न कर्तव्यं भरतस्य कदाचन।
स हि राजा च वैदेहि देशस्य च कुलस्य च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'विदेहनन्दिनी! तुम्हें भरत की इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस समय वे मेरे देश और कुल के राजा हैं।
 
'Videhanandini! You should not do anything against the wishes of Bharata because at this time he is the king of my country and clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)