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ramayan 2.26.29: 'कल्याणि! निष्पाप सीता! मेरे ऋषियों की सेवा के लिए वन में जाकर तुम प्रायः व्रत-उपवास में संलग्न रहो। 29॥   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.26.29 
याते च मयि कल्याणि वनं मुनिनिषेवितम्।
व्रतोपवासपरया भवितव्यं त्वयानघे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणि! निष्पाप सीता! मेरे ऋषियों की सेवा के लिए वन में जाकर तुम प्रायः व्रत-उपवास में संलग्न रहो। 29॥
 
'Kalyani! Sinless Sita! After going to the forest to serve my sages, you should often engage in fasting and fasting. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)