Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.26.24-25: इस समय मैं निर्जन वन में जाकर आपसे मिलने आया हूँ। आपको भरत के सामने मेरी प्रशंसा कभी नहीं करनी चाहिए; क्योंकि धनवान पुरुष दूसरों की प्रशंसा सहन नहीं कर सकते। इसलिए मैं आपको भरत के सामने मेरे गुणों की प्रशंसा न करने को कहता हूँ॥ 24-25॥ | ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽहं त्वामागतो द्रष्टुं प्रस्थितो विजनं वनम्।
भरतस्य समीपे ते नाहं कथ्य: कदाचन॥ २४॥
ऋद्धियुक्ता हि पुरुषा न सहन्ते परस्तवम्।
तस्मान्न ते गुणा: कथ्या भरतस्याग्रतो मम॥ २५॥
अनुवाद
इस समय मैं निर्जन वन में जाकर आपसे मिलने आया हूँ। आपको भरत के सामने मेरी प्रशंसा कभी नहीं करनी चाहिए; क्योंकि धनवान पुरुष दूसरों की प्रशंसा सहन नहीं कर सकते। इसलिए मैं आपको भरत के सामने मेरे गुणों की प्रशंसा न करने को कहता हूँ॥ 24-25॥
‘At this time I have left for a deserted forest and have come here to meet you. You should never praise me in front of Bharata; because prosperous men cannot bear the praise of others. That is why I am telling you not to praise my qualities in front of Bharata.॥ 24-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥