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ramayan 2.26.23: 'इस कारण मेरे पिता ने भरत को युवराज नियुक्त किया और मेरे लिए दूसरा वर स्वीकार किया, जिसके अनुसार मुझे चौदह वर्ष तक दण्डकारण्य में रहना होगा।॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 2.26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.26.23 
चतुर्दश हि वर्षाणि वस्तव्यं दण्डके मया।
पित्रा मे भरतश्चापि यौवराज्ये नियोजित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'इस कारण मेरे पिता ने भरत को युवराज नियुक्त किया और मेरे लिए दूसरा वर स्वीकार किया, जिसके अनुसार मुझे चौदह वर्ष तक दण्डकारण्य में रहना होगा।॥ 23॥
 
'Because of this, my father appointed Bharat as the crown prince and accepted another boon for me, according to which I will have to live in Dandakaranya for fourteen years.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)