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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.26.16 
न हस्ती चाग्रत: श्रीमान् सर्वलक्षणपूजित:।
प्रयाणे लक्ष्यते वीर कृष्णमेघगिरिप्रभ:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'वीर! यात्रा के समय समस्त शुभ चिह्नों से सुशोभित तथा काले बादलों से आच्छादित पर्वत के समान विशाल दिखने वाला वह विशाल एवं तेजस्वी हाथी आज तुम्हें क्यों दिखाई नहीं दे रहा है?॥ 16॥
 
'Valiant! Why is the huge and majestic elephant, adorned with all the auspicious signs during your journey and looking as huge as a mountain covered with dark clouds, not visible to you today?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)