श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.25.8 
स्वस्ति साध्याश्च विश्वे च मरुतश्च महर्षिभि:।
स्वस्ति धाता विधाता च स्वस्ति पूषा भगोऽर्यमा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'साध्य, विश्वेदेव और महर्षिगण सहित मरुद्गण तुम्हारा कल्याण करें; देव और विधाता तुम्हारा कल्याण करें; पूषा, भग और अर्यमा तुम्हारा कल्याण करें॥8॥
 
'May Sadhya, Vishvedev and Maharishis along with Marudgan bless you; May God and Creator bless you; May Pusha, Bhag and Aryama bless you. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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