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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना
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श्लोक 6
श्लोक
2.25.6
पितृशुश्रूषया पुत्र मातृशुश्रूषया तथा।
सत्येन च महाबाहो चिरं जीवाभिरक्षित:॥ ६॥
अनुवाद
महाबाहुपुत्र! पिता और माता की सेवा तथा सत्य का पालन करते हुए तुम सुरक्षित और दीर्घायु रहो।
‘Son of Mahabahu! May you remain safe and long-lived by serving your father, your mother and by adhering to truth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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