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श्लोक 2.25.5  |
यानि दत्तानि तेऽस्त्राणि विश्वामित्रेण धीमता।
तानि त्वामभिरक्षन्तु गुणै: समुदितं सदा॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| 'तुम उत्तम गुणों से प्रकाशित हो; बुद्धिमान विश्वामित्र द्वारा तुम्हें दिए गए समस्त अस्त्र-शस्त्र सब ओर से तुम्हारी सदैव रक्षा करें। ॥5॥ |
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| 'You are illuminated with good virtues; may all the weapons given to you by the wise Visvamitra protect you from all sides at all times. ॥ 5॥ |
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