श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.25.46 
अतीव चाश्रुप्रतिपूर्णलोचना
समाप्य च स्वस्त्ययनं यथाविधि।
प्रदक्षिणं चापि चकार राघवं
पुन: पुनश्चापि निरीक्ष्य सस्वजे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आँखों में आँसू भरकर माता ने स्वस्ति वाचन का अनुष्ठान पूरा किया और फिर श्रीराम की परिक्रमा की तथा बार-बार उनकी ओर देखकर उन्हें हृदय से लगा लिया।
 
In this manner, with tears in her eyes, the mother completed the ritual of reciting the Swasti Vachan. Then she circumambulated Shri Ram and looking at him repeatedly, embraced him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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