श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.25.23 
शुक्र: सोमश्च सूर्यश्च धनदोऽथ यमस्तथा।
पान्तु त्वामर्चिता राम दण्डकारण्यवासिनम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! मेरे द्वारा पूजित शुक्र, सोम, सूर्य, कुबेर और यम दण्डकारण्य में निवास करते हुए सदैव आपकी रक्षा करें॥ 23॥
 
'Shri Ram! May Shukra, Som, Surya, Kubera and Yama - worshipped by me - always protect you while residing in Dandakaranya.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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