vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना
»
श्लोक 19
श्लोक
2.25.19
महाद्विपाश्च सिंहाश्च व्याघ्रा ऋक्षाश्च दंष्ट्रिण:।
महिषा: शृङ्गिणो रौद्रा न ते द्रुह्यन्तु पुत्रक॥ १९॥
अनुवाद
‘बेटा! जंगल में बड़े-बड़े हाथी, सिंह, बाघ, भालू, अन्य दांत वाले जानवर और बड़े-बड़े सींग वाले भयंकर भैंसे भी तुम्हें धोखा न दें।
‘Son! Big elephants, lions, tigers, bears, other animals with teeth and fierce buffaloes with huge horns should not betray you in the forest.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas