श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.25.19 
महाद्विपाश्च सिंहाश्च व्याघ्रा ऋक्षाश्च दंष्ट्रिण:।
महिषा: शृङ्गिणो रौद्रा न ते द्रुह्यन्तु पुत्रक॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! जंगल में बड़े-बड़े हाथी, सिंह, बाघ, भालू, अन्य दांत वाले जानवर और बड़े-बड़े सींग वाले भयंकर भैंसे भी तुम्हें धोखा न दें।
 
‘Son! Big elephants, lions, tigers, bears, other animals with teeth and fierce buffaloes with huge horns should not betray you in the forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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