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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना
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श्लोक 17
श्लोक
2.25.17
राक्षसानां पिशाचानां रौद्राणां क्रूरकर्मणाम्।
क्रव्यादानां च सर्वेषां मा भूत् पुत्रक ते भयम्॥ १७॥
अनुवाद
‘पुत्र! तुम्हें भयंकर राक्षसों, क्रूर भूतों और सभी मांसाहारी पशुओं से कभी भय न हो।
‘Son! May you never be afraid of terrible demons, cruel ghosts and all carnivorous animals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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