श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 25: कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गल कामना पूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.25.11 
स्कन्दश्च भगवान् देव: सोमश्च सबृहस्पति:।
सप्तर्षयो नारदश्च ते त्वां रक्षन्तु सर्वत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'भगवान स्कंददेव, सोम, बृहस्पति, सप्तऋषि और नारद आपकी सभी ओर से रक्षा करें। 11।
 
'May Lord Skandadev, Soma, Brihaspati, Saptarishis and Narada protect you from all sides. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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