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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 24: कौसल्या का श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये आग्रह करना , श्रीराम का उन्हें रोकना और वन जाने के लिये उनकी अनुमति प्राप्त करना
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श्लोक 17
श्लोक
2.24.17
इमानि तु महारण्ये विहृत्य नव पञ्च च।
वर्षाणि परमप्रीत्या स्थास्यामि वचने तव॥ १७॥
अनुवाद
इन चौदह वर्षों में मैं विशाल वन में विचरण करता हुआ लौट आऊँगा और बड़े प्रेम से आपकी आज्ञाओं का पालन करता रहूँगा।॥17॥
'During these fourteen years I shall roam around in the vast forest and then return, and I shall continue to obey your commands with great love.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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