श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 23: लक्ष्मण की ओज भरी बातें, उनके द्वारा दैव का खण्डन और पुरुषार्थ का प्रतिपादन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.23.29 
मङ्गलैरभिषिञ्चस्व तत्र त्वं व्यापृतो भव।
अहमेको महीपालानलं वारयितुं बलात्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अतः आप कृपया शुभ अभिषेक सामग्री से अपना अभिषेक करवाएँ। इस अभिषेक के लिए तैयार रहें। मैं ही समस्त विरोधी राजाओं को बलपूर्वक रोकने में समर्थ हूँ॥29॥
 
‘Therefore, please allow yourself to be anointed with auspicious anointment materials. Be prepared for this anointment. I alone am capable of stopping all the opposing kings by force.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)