श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 23: लक्ष्मण की ओज भरी बातें, उनके द्वारा दैव का खण्डन और पुरुषार्थ का प्रतिपादन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.23.22 
यैर्विवासस्तवारण्ये मिथो राजन् समर्थित:।
अरण्ये ते विवत्स्यन्ति चतुर्दश समास्तथा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'हे राजन! जिन लोगों ने आपके वनवास का समर्थन किया है, वे स्वयं चौदह वर्ष तक वन में जाकर छिपेंगे।
 
'O King! Those who have supported your exile will themselves go and hide in the forest for fourteen years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)