श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 23: लक्ष्मण की ओज भरी बातें, उनके द्वारा दैव का खण्डन और पुरुषार्थ का प्रतिपादन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.23.10 
लोकविद्विष्टमारब्धं त्वदन्यस्याभिषेचनम्।
नोत्सहे सहितुं वीर तत्र मे क्षन्तुमर्हसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
(बड़े पुत्र के गुणवान होते हुए भी छोटे पुत्र का राज्याभिषेक) यह प्रजा-विरोधी कार्य है, जिसका आज से ही आरम्भ हुआ है। मैं आपके अतिरिक्त किसी अन्य का राज्याभिषेक सहन नहीं कर सकता। कृपया इसके लिए मुझे क्षमा करें॥10॥
 
(Coronation of the younger son while the elder son is full of merit) This is an act against the people, which has been started today. I cannot tolerate anyone else being coronated except you. Please forgive me for this.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)