श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.21.8 
यावदेव न जानाति कश्चिदर्थमिमं नर:।
तावदेव मया सार्धमात्मस्थं कुरु शासनम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! जब तक आपके वनवास का किसी को पता न चले, तब तक आप मेरी सहायता से इस राज्य का शासन-भार अपने हाथ में लीजिए।
 
'Raghunandan! Till the time no one knows about your exile, you should take the reins of governance of this kingdom in your hands with my help.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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