श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.21.7 
तदिदं वचनं राज्ञ: पुनर्बाल्यमुपेयुष:।
पुत्र: को हृदये कुर्याद् राजवृत्तमनुस्मरन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'ऐसे राजा के वचनों को कौन अपने हृदय में स्थान दे सकता है, जो पुनः बालपन (अविवेक) को प्राप्त हो गया हो?'
 
'Who can give a place in his heart to the words of such a king who has regained childishness (indiscretion)?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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