श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.21.61 
तस्मिन् पुनर्जीवति धर्मराजे
विशेषत: स्वे पथि वर्तमाने।
देवी मया सार्धमितोऽभिगच्छेत्
कथंस्विदन्या विधवेव नारी॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
'धर्म के संस्थापक महाराज अभी जीवित हैं और अपने धर्ममार्ग में स्थित हैं, ऐसी अवस्था में मेरी माता मेरे साथ वन में कैसे जा सकती है, जैसे कोई अन्य विधवा अपने पुत्र के साथ रहती है ?॥ 61॥
 
'That Maharaja, the founder of religion, is still alive and is well established in his religious path, in such a condition how can my mother accompany me to the forest, just as any other widow lives with her son?॥ 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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