श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.21.6 
देवकल्पमृजुं दान्तं रिपूणामपि वत्सलम्।
अवेक्षमाण: को धर्मं त्यजेत् पुत्रमकारणात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'धर्म पर दृष्टि रखने वाला कौन राजा अपने (श्री राम के समान) पुत्र को, जो देवता के समान शुद्ध और सरल है, जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है और जो शत्रुओं पर भी स्नेह करता है, बिना किसी कारण के त्याग देगा?॥6॥
 
'Which king, having an eye on Dharma, would abandon his son (like Shri Ram) who is as pure and simple as a god, who has controlled his senses and who is affectionate even towards his enemies, without any reason?॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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