श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.21.47 
तीर्णप्रतिज्ञश्च वनात् पुनरेष्याम्यहं पुरीम्।
ययातिरिव राजर्षि: पुरा हित्वा पुनर्दिवम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में राजा ययाति स्वर्ग को त्यागकर पृथ्वी पर आये थे, उसी प्रकार मैं भी अपनी प्रतिज्ञा पूरी करके वन से अयोध्यापुरी को लौट जाऊँगा।
 
Just as in the past King Yayati had abandoned the heaven and come down to the earth, similarly, after fulfilling my promise, I too shall return from the forest to Ayodhyapuri.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd