श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.21.46 
अनुमन्यस्व मां देवि गमिष्यन्तमितो वनम्।
शापितासि मम प्राणै: कुरु स्वस्त्ययनानि मे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'देवी! मैं यहाँ से वन में जा रहा हूँ। कृपया मुझे अनुमति दीजिए और स्वस्ति मंत्र का उच्चारण करवाइए। मैं अपने जीवन की शपथ लेकर यह कह रहा हूँ।' 46.
 
‘Goddess! I will go to the forest from here. Please give me permission and make me recite the Swasti mantra. I am saying this by swearing on my life. 46.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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