श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.21.44 
तदेतां विसृजानार्यां क्षत्रधर्माश्रितां मतिम्।
धर्ममाश्रय मा तैक्ष्ण्यं मद‍्बुद्धिरनुगम्यताम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अतः इस क्षुद्र बुद्धि को त्याग दो, जो केवल क्षात्रधर्म का पालन करती है, धर्म की शरण लो, कठोरता का त्याग करो और मेरी सलाह के अनुसार आचरण करो ॥ 44॥
 
"Therefore give up this petty intellect which only follows the kshatradharma, take refuge in dharma, give up harshness and act according to my advice." ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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