श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.21.39 
तव लक्ष्मण जानामि मयि स्नेहमनुत्तमम्।
विक्रमं चैव सत्त्वं च तेजश्च सुदुरासदम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! मैं जानता हूँ कि तुम मुझ पर कितना स्नेह करते हो। मैं तुम्हारे पराक्रम, धैर्य और प्रचण्ड बल से भी परिचित हूँ।
 
'Lakshmana! I know the immense affection you have for me. I also know about your valour, patience and fierce strength.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)