श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.21.36 
नाहं धर्ममपूर्वं ते प्रतिकूलं प्रवर्तये।
पूर्वैरयमभिप्रेतो गतो मार्गोऽनुगम्यते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'माँ! मैं आपके विरुद्ध कोई नया धर्म प्रचारित नहीं कर रहा हूँ। पूर्वकाल के धार्मिक पुरुषों ने भी यही चाहा था। मैं तो उनके बताए मार्ग पर ही चलता हूँ।' 36.
 
‘Ma! I am not propagating any new religion contrary to you. The religious men of the past also desired this. I only follow the path trodden by them. 36.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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