श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.21.35 
न खल्वेतन्मयैकेन क्रियते पितृशासनम्।
एतैरपि कृतं देवि ये मया परिकीर्तिता:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'देवी! मैं अकेला नहीं हूँ जो इस प्रकार पिता की आज्ञा का पालन कर रहा हूँ। जिन लोगों की मैंने अभी चर्चा की है, उन सभी ने भी पिता की आज्ञा का पालन किया है।
 
‘Devi! I am not the only one who is following father's orders in this manner. All those whom I have just discussed have also followed father's orders.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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