श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.21.34 
एतैरन्यैश्च बहुभिर्देवि देवसमै: कृतम्।
पितुर्वचनमक्लीबं करिष्यामि पितुर्हितम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'देवी! इसने तथा अन्य अनेक देवतुल्य लोगों ने अपने पिता की आज्ञा का उत्साहपूर्वक पालन किया है। अतः मैं भी अपनी कायरता त्यागकर अपने पिता का कल्याण करूँगा॥ 34॥
 
‘Devi! He and many other god-like people have enthusiastically followed the orders of their father. Therefore, I will also leave my cowardice and do good for my father.॥ 34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd