श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.21.32 
अस्माकं तु कुले पूर्वं सगरस्याज्ञया पितु:।
खनद्भि: सागरैर्भूमिमवाप्त: सुमहान् वध:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'हमारे कुल में भी राजा सगर के पुत्र हुए हैं जो अपने पिता की आज्ञा से पृथ्वी खोदते समय भयंकर रूप से मारे गए थे॥ 32॥
 
'In our clan too, there have been sons of King Sagar who, on the orders of their father, were horribly killed while digging the earth.॥ 32॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd