श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.21.28 
ततस्त्वं प्राप्स्यसे पुत्र निरयं लोकविश्रुतम्।
ब्रह्महत्यामिवाधर्मात् समुद्र: सरितां पति:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'बेटा, यदि ऐसा हुआ तो तुम्हें संसार-प्रसिद्ध नरक-तुल्य कष्ट भोगने पड़ेंगे, जो ब्रह्महत्या के समान है और जो नदियों के स्वामी समुद्र को अपने पापों के फलस्वरूप भोगना पड़ा था।'*॥28॥
 
'Son, if this happens then you will have to undergo the world-famous hell-like sufferings, which is equivalent to the killing of a brahmin and which the ocean, the lord of rivers, had to undergo as a result of his sins.'*॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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