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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना
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श्लोक 27
श्लोक
2.21.27
यदि त्वं यास्यसि वनं त्यक्त्वा मां शोकलालसाम्।
अहं प्रायमिहासिष्ये न च शक्ष्यामि जीवितुम्॥ २७॥
अनुवाद
यदि आप मुझे इस दुःख की स्थिति में छोड़कर वन में चले जायेंगे, तो मैं उपवास करके प्राण त्याग दूँगा; मैं जीवित नहीं रह सकूँगा।
"If you leave me in this state of grief and go to the forest, I will fast and give up my life; I will not be able to survive." 27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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