श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.21.26 
त्वद्वियोगान्न मे कार्यं जीवितेन सुखेन च।
त्वया सह मम श्रेयस्तृणानामपि भक्षणम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
"आपके साथ रहते हुए तो मेरे लिए तिनके चबाना अच्छा है, लेकिन यदि मैं आपसे अलग हो जाऊं तो इस जीवन या सुख का मुझे कोई उपयोग नहीं है।" 26.
 
"It is better for me to chew straws while being with you, but if I am separated from you then I have no use for this life or happiness." 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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