श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.21.24 
शुश्रूषुर्जननीं पुत्र स्वगृहे नियतो वसन्।
परेण तपसा युक्त: काश्यपस्त्रिदिवं गत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'बेटा! नियमपूर्वक घर में रहकर माता की सेवा करने वाले कश्यप जी उत्तम तपस्या करके स्वर्गलोक को चले गये।
 
'Son! Kashyap, who lived regularly in his house and served his mother, went to heaven after performing excellent penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)