श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.21.23 
धर्मज्ञ इति धर्मिष्ठ धर्मं चरितुमिच्छसि।
शुश्रूष मामिहस्थस्त्वं चर धर्ममनुत्तमम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘धर्मिष्ठा! तुम धर्म को जानने वाले हो, अतः यदि तुम धर्म का पालन करना चाहते हो तो यहीं रहकर मेरी सेवा करो और इस प्रकार उत्तम धर्म का आचरण करो।
 
‘Dharmishtha! You are the one who knows the religion, hence if you want to follow the religion then stay here and serve me and thus practice the best religion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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