श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.21.16 
अनुरक्तोऽस्मि भावेन भ्रातरं देवि तत्त्वत:।
सत्येन धनुषा चैव दत्तेनेष्टेन ते शपे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘देवि (बड़ी माता!) मैं सत्य, धनुष, दान और यज्ञ आदि की शपथ लेकर आपसे सत्य कहता हूँ कि मुझे अपने पूज्य भाई श्री रामजी पर बड़ा स्नेह है।॥ 16॥
 
‘Devi (elder mother!) I swear by truth, bow, charity and sacrifice etc. and tell you the truth that I have deep affection for my respected brother Shri Ram.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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