श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.21.15 
त्वया चैव मया चैव कृत्वा वैरमनुत्तमम्।
कास्य शक्ति: श्रियं दातुं भरतायारिशासन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले श्री राम! आपसे और मुझसे घोर वैर करके इन लोगों में क्या शक्ति है कि ये इस राज्य का धन भरत को दे दें?॥ 15॥
 
'O destroyer of enemies, Sri Rama! Having developed a deep enmity towards you and me, what power do these people have to give away this kingdom's wealth to Bharat?॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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