श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.21.14 
बलमेष किमाश्रित्य हेतुं वा पुरुषोत्तम।
दातुमिच्छति कैकेय्यै उपस्थितमिदं तव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषोत्तम! राजन्! आप किस बल या कारण से यह राज्य, जो आपको न्यायपूर्वक मिला है, कैकेयी को देना चाहते हैं?
 
'Purushottam! King, by what force or reason do you wish to give this kingdom, which you got justly, to Kaikeyi?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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