श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.21.13 
गुरोरप्यवलिप्तस्य कार्याकार्यमजानत:।
उत्पथं प्रतिपन्नस्य कार्यं भवति शासनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'क्योंकि यदि गुरु भी अभिमानी हो जाए और अपने कर्तव्यों का ज्ञान खोकर कुमार्ग पर चलने लगे, तो उसे भी दण्ड देना आवश्यक हो जाता है।॥13॥
 
'Because if the Guru too becomes arrogant and loses the knowledge of his duties and starts walking on the wrong path, then it becomes necessary to punish him too.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)