श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 21: लक्ष्मण का श्रीराम को बलपूर्वक राज्य पर अधिकार कर लेने के लिये प्रेरित करना तथा श्रीराम का पिता की आज्ञा के पालन को ही धर्म बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.21.11 
भरतस्याथ पक्ष्यो वा यो वास्य हितमिच्छति।
सर्वांस्तांश्च वधिष्यामि मृदुर्हि परिभूयते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भरत का पक्ष लेगा या उसका हित चाहेगा, मैं उन सबको मार डालूँगा, क्योंकि सब लोग नम्र और विनम्र पुरुष का तिरस्कार करते हैं॥11॥
 
'Whoever takes Bharat's side or who seeks his welfare, I will kill them all, because everyone despises a person who is gentle and humble.॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd