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श्लोक 2.20.40  |
अतो दु:खतरं किं नु प्रमदानां भविष्यति।
मम शोको विलापश्च यादृशोऽयमनन्तक:॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| 'स्त्रियों के लिए इससे बढ़कर और क्या दुःख हो सकता है? इसलिए मेरा शोक और विलाप ऐसा है कि उसका अन्त ही नहीं होता ॥40॥ |
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| 'What can be a greater sorrow for women than this? Therefore my grief and lamentation is such that it never ends. ॥ 40॥ |
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